Wednesday, 29 July 2015

एक सपना जो अधूरा रह गया !!!

सही मायनो में वर्तमान भारत में एक ही आदमी थे  इससे मिलने की मैं हमेशा कामनाये किया करता था , कारण  भी बहुत साफ था, वो जिस पृष्टभूमि से आते है और जिस जगह तक पहुंचे है वो एक दिव्य  स्वप्न प्रतीत होता है. कहने को उन्होंने देश के सर्वोच्च पद को भी सुशोभित किया है लकिन वह अपने आप को हमेशा एक शिक्षक कहलाना पसंद करते है. जिस उम्र में लोग बिस्तर में पड़े पड़े अपने पोतों नातियों के साथ समय बिताते है उस वक़्त भी वो सिर्फ एक ही सवाल अपने आप से किया करते थे what I  can give ? और इस के उत्तर में ही वो दिन रात देश के जवान बच्चो के बीच समय बिताने का बहाना ढूंढा करते थे।  वो कोई और नहीं हमारे सबसे प्यारे और जनता के राष्ट्रपति माननिये APJ अब्दुल कलाम  सहाब है। 

2  दिन पहले ही मैं अपने एक  मित्र के साथ चर्चा कर रहा था की यार कलाम साब से मिला जाए तो उसने मुझे पूछा-
 तू उनसे मिलके पूछेगा क्या? 
तू उनसे किन मुद्दो पे बात करेगा?
क्या तुम्हारा ज्ञान और बौद्धिकता इतनी है कि तू उनसे बात कर पाये ?
मैंने सिर्फ इतना कहा कि हो सकता है मेरा ज्ञान इतना नहीं की मैं उन जैसे महान व्यक्ति के कोई सवाल जवाब कर सकु लेकीन मैं एक बात जनता हु उन्हें नौजवान लोगो से मिलना अच्छा लगता है और वो मेरे बातो को ध्यान से सुनेंगे और अगर मैं कोई गलती कर भी दूंगा तो वो बुरा नहीं मानेगे बल्कि उसे ठीक करने में मेरे मदद भी करेंगे। 

मैं कलाम साब से 2 मुद्दो पे बात करना चाहता था।  आज वो  हमारे बीच नहीं रहे लकिन शायद सुकरात की तरह वो भी कभी हमारे बीच से हमेशा के लिए दूर नहीं होंगे।  मैं उनसे शिक्षा और पंचायती राज पर बात करना चाह रहा था।  वैसे मैं एक विशेष दिन का इंतज़ार कर रहा था उनसे मिलने का लकिन   दुर्भाग्य से मैं किनारे पे पहुंच के रह गया लकिन तब भी मैंने अपने दिल को तस्सली दे दी थी की अभी भी मेरे पास वक़्त है क्यूंकि कलाम साब अभी भी एक 30  साल के जवान की माफिक काम कर रहे थे। किसने सोचा था की वो अपना प्रिय  काम बच्चो से इंटरेक्शन करते करते ही हमे अलविदा कह देंगे?

मेरे कुछ सवाल और सुझाव जो कलाम साब से मिलकर डिसकस करना चाह रहा था …… 
1  पंचायती  राज 
आप एक पुस्तक इस विषय पर लिखे जिसमे एक काल्पनिक गाॉव हो जिसमे दुनिया भर की सारी समस्याए हो, उसमे अच्छे बुरे सभी प्रकार के नागरिक हो, जहा तक सरकार की विशेष पहुंच नहीं हैं। .......... उसके बाद कुछ नौजवानो तथा जागरूक नागरिको की दृढ इच्छाशक्ति के चलते सिमित संसाधनो और विशेष कर के बिना सरकारी  सहयोग के , जनता के आपस में या भामाशाहो के जरिये विकास के हर उस मुकाम को हासिल कर लिया जाता है जो किसी आदर्श गाॉव में होता है. इसमें एक सुनियोजित रणनीति का जिक्र हो ताकि हरेक संरपच  अगर अपने गाॉव का विकास करना चाहे तो उस मॉडल का प्रयोग कर सकता है.

जिस तरीके से आप बच्चो और नौजवानो से मिलते है उसी तर्ज पर आप जिस भी राज्य या जिले में जाए- एक मीटिंग सरपंचों से साथ भी रख लेवे और जो चीजे आपकी बुक्स में है उनको सामने बताये जैसे आप एनुअल टारगेट सेट करो, पंचवर्षीय योजना बनाओ, कुछ सामाजिक पैमानों पर फेज मैंने में काम करो जैसे शिक्षा स्वस्थ्य का क्या लक्ष्य रखा जाएं ?

2  शिक्षा 
इस विषय में सुझाव नहीं बल्कि मुझे कुछ पूछना था----
आपके इतना मोटीवेट करने के बावजूद आज भी लोगो की विज्ञान के प्रति रूचि में लगातार कमी आ रही है, आपके बाद इस दायित्व का इतनी ही intensty  के साथ कौन निर्वाह कर पायेगा? 
और अगर मैं करना चाहू  तो मुझे किन बातो का ख़याल रखना चाहिए और एक ********  के तौर पर मुझे  कैसे सरकारी तंत्र का बेहतर उपयोग करना चाहिए। 

उनके साथ मुझे अपने  आदर्श नागरिक कार्यक्रम (ANK, अंक ) पर चर्चा करनी थी, जिसमे बच्चो और नौजवानो के लिए मैंने कुछ प्लान आउट किया है। 


एक सपना अधूरा रह गया है। 
कलाम साब से मिलना बाकी रह गया है।।

माननिये प्रधान मंत्री जी को मैंने चिट्ठी  लिखी है जिसमे एक सुझाव दिया है की 27 जुलाई को शिक्षा श्रमदान दिवस (KALAM Knowledge And Learning Achievement Mission )  के रूप में मनाया जाए. इस दिन सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर  और छात्र अपना पूरा दिन किसी एक स्कूल या स्कूलों के समूह में बिताये और उसमे अपनी पसंद के अनुसार कुछ इवेंट्स या वर्कशॉप्स आयोजित करे और उनको सोशल मीडिया पर शेयर करे ताकि बाकि लोग भी उनके काम देख के मोटीवेट हो सके। 

धन्यवाद 

No comments:

Post a Comment